रेलवे सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1968 बताते हैं कि कदाचार से कैसे निपटा जाए: कौन निलंबित या दंडित कर सकता है, कौन-से दंड हैं, आरोप कैसे बनाए और जाँचे जाते हैं, और कर्मचारी कैसे अपील कर सकता है। इनमें 7 भाग और 31 नियम हैं, और ये अनुच्छेद 311 के अनुरूप संविधान के अनुच्छेद 309 के अंतर्गत बनाए गए हैं।
- अनुच्छेद 310: सरकारी सेवक राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
- अनुच्छेद 311(1): किसी को उसकी नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी से अधीनस्थ प्राधिकारी द्वारा बर्खास्त या सेवा से हटाया नहीं जा सकता।
- अनुच्छेद 311(2): किसी को ऐसी जाँच के बिना बर्खास्त, सेवा से हटाया या पदावनत नहीं किया जा सकता, जिसमें उसे आरोप बताए जाएँ और सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए।
- ये नियम अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों, रेलवे सुरक्षा बल या आकस्मिक रोज़गार वाले व्यक्तियों पर लागू नहीं होते।
प्राधिकारी
| प्राधिकारी | अर्थ |
|---|---|
| नियुक्ति प्राधिकारी | इनमें से सबसे ऊँचा: सेवा या ग्रेड में नियुक्ति के लिए सशक्त प्राधिकारी, धारित पद पर नियुक्ति के लिए सशक्त प्राधिकारी, या जिसने वास्तव में नियुक्ति की |
| अनुशासनिक प्राधिकारी (डीए) | नियम 6 के अंतर्गत दंड देने के लिए सशक्त प्राधिकारी; स्थानापन्न कर्मचारी के लिए स्थानापन्न पद के आधार पर |
| अपीलीय प्राधिकारी | दंड देने वाले प्राधिकारी से अगला उच्च प्राधिकारी |
| पुनरीक्षण प्राधिकारी | अपीलीय प्राधिकारी से अगला उच्च प्राधिकारी |
| जाँच अधिकारी (आईओ) | जाँच करने के लिए डीए द्वारा नामित व्यक्ति या समिति; डीए स्वयं भी हो सकता है |
| बचाव सहायक | आरोपित कर्मचारी की सहायता करने वाला रेल कर्मचारी (या मान्यताप्राप्त ट्रेड यूनियन पदाधिकारी); भुगतान लेने वाला वकील नहीं |
निलंबन (नियम 5)
निलंबन दंड नहीं है। कर्मचारी को तब निलंबित किया जा सकता है जब अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित या लंबित हो, जब वह राज्य की सुरक्षा के प्रतिकूल गतिविधियों में लगा हो, या जब उसके विरुद्ध आपराधिक मामला जाँच, पूछताछ या विचारण में हो।
- मानित निलंबन: 48 घंटे से अधिक हिरासत में रहने की तारीख से, या 48 घंटे से अधिक की सज़ा वाली दोषसिद्धि की तारीख से, यदि तुरंत बर्खास्त न किया जाए।
- निलंबन आदेश 90 दिन बाद समाप्त हो जाता है, जब तक उससे पहले समीक्षा कर बढ़ाया न जाए; हर विस्तार एक बार में 180 दिन से अधिक का नहीं हो सकता।
- यदि निलंबन के 3 महीने के भीतर आरोप पत्र जारी न हो, तो कर्मचारी को निलंबन का कारण बताना होता है।
- निलंबन के दौरान अवकाश नहीं दिया जा सकता। कर्मचारी मुख्यालय केवल उप विभागाध्यक्ष से अनिम्न प्राधिकारी की अनुमति से छोड़ सकता है।
- निलंबित कर्मचारी को निर्वाह भत्ता मिलता है। पीएफ अंशदान और न्यायालय कुर्की इससे वर्जित कटौतियाँ हैं; मकान किराया, बिजली, जीआईएस और आयकर अनुमेय कटौतियाँ हैं।
- यदि निलंबन के बाद वृहद दंड न दिया जाए, या निलंबन में कर्मचारी की मृत्यु हो जाए, तो उस अवधि को ड्यूटी माना जा सकता है।
दंड (नियम 6)
| खंड | दंड | प्रकार |
|---|---|---|
| (i) | परिनिंदा | लघु |
| (ii) | निर्दिष्ट अवधि के लिए पदोन्नति रोकना | लघु |
| (iii) | लापरवाही या आदेश के उल्लंघन से हुई हानि की वेतन से वसूली | लघु |
| (iii-a) | विशेषाधिकार पास या पीटीओ, या दोनों रोकना | लघु |
| (iii-b) | अधिकतम 3 वर्ष के लिए वेतनमान में एक चरण नीचे, संचयी प्रभाव के बिना और पेंशन पर असर के बिना | लघु |
| (iv) | निर्दिष्ट अवधि के लिए वेतनवृद्धि रोकना, यह बताते हुए कि भविष्य की वेतनवृद्धि टलेगी या नहीं | लघु |
| (v) | निर्दिष्ट अवधि के लिए वेतनमान में निचले चरण पर लाना | वृहद |
| (vi) | निचले वेतनमान, ग्रेड, पद या सेवा पर लाना | वृहद |
| (vii) | अनिवार्य सेवानिवृत्ति | वृहद |
| (viii) | सेवा से हटाना (भविष्य में सरकारी नौकरी में बाधा नहीं) | वृहद |
| (ix) | सेवा से बर्खास्तगी (सामान्यतः भविष्य में सरकारी नौकरी में बाधा) | वृहद |
- जिस कृत्य से ट्रेनों की टक्कर हुई हो, या सामान्यतः हो सकती थी, उसके लिए सामान्यतः सेवा से हटाना या बर्खास्तगी दी जानी चाहिए।
- खतरे पर सिग्नल पार करने के लिए सामान्यतः खंड (v) से (ix) में से कोई दंड दिया जाना चाहिए।
- आय से अधिक संपत्ति या अवैध परितोषण लेने पर सामान्यतः सेवा से हटाना या बर्खास्तगी दी जानी चाहिए। इनमें से किसी मामले में कम दंड देने पर कारण लिखित में दर्ज करने होते हैं।
- सेवा से हटाने और बर्खास्तगी दोनों में पेंशन के लिए पिछली सेवा ज़ब्त हो जाती है; डीए पेंशन के 2/3 तक अनुकंपा भत्ता दे सकता है।
लघु दंड की प्रक्रिया (नियम 11)
- लघु दंड का आरोप ज्ञापन मानक प्रपत्र 11 में आरोपों के विवरण के साथ जारी होता है; कर्मचारी को अभ्यावेदन के लिए 10 दिन दिए जाते हैं।
- जाँच केवल तब होती है जब डीए आवश्यक समझे; पर यदि प्रस्तावित वेतनवृद्धि रोक पेंशन को प्रभावित करे, 3 वर्ष से अधिक हो, या संचयी प्रभाव वाली हो, तो जाँच अनिवार्य है।
वृहद दंड की प्रक्रिया (नियम 9 और 10)
- मानक प्रपत्र 5 में आरोप पत्र, चार अनुलग्नकों के साथ: आरोप के अनुच्छेद, आरोपों का विवरण, दस्तावेज़ों की सूची, गवाहों की सूची। कर्मचारी दस्तावेज़ देख सकता है और 10 दिन में लिखित बचाव दे सकता है।
- यदि डीए को लगे कि लघु दंड पर्याप्त है, तो वह बिना और अवसर दिए दे सकता है; अन्यथा वह स्वयं जाँच करता है या जाँच अधिकारी (मानक प्रपत्र 7) और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी (मानक प्रपत्र 8) नियुक्त करता है।
- बचाव सहायक को जाँच अधिकारी की नियुक्ति के 20 दिन के भीतर नामित करना होता है। वकील की अनुमति नहीं, जब तक प्रस्तुतकर्ता अधिकारी स्वयं वकील न हो या डीए अनुमति न दे।
- जाँच में पहले अभियोजन पक्ष के गवाहों की जाँच होती है और बचाव पक्ष जिरह करता है; फिर कर्मचारी अपना बचाव रखता है और अपने गवाह पेश करता है। कर्मचारी उपस्थित न हो, तो जाँच एकपक्षीय हो सकती है।
- जाँच रिपोर्ट में हर आरोप के लिए बचाव, साक्ष्य का मूल्यांकन, निष्कर्ष और कारण होते हैं। इसकी प्रति कर्मचारी को दी जाती है, जो 15 दिन में अभ्यावेदन दे सकता है।
- इसके बाद डीए सकारण आदेश पारित करता है। यदि दंड उसकी क्षमता से बाहर हो, तो वह मामला सक्षम प्राधिकारी को भेजता है।
नियम 14 तीन स्थितियों में सामान्य जाँच के बिना दंड की अनुमति देता है: ऐसा आचरण जिससे आपराधिक आरोप में दोषसिद्धि हुई; जहाँ डीए लिखित में दर्ज करे कि जाँच उचित रूप से संभव नहीं; और जहाँ राष्ट्रपति तय करें कि राज्य सुरक्षा के हित में जाँच उचित नहीं।
अपील, पुनरीक्षण और पुनर्विलोकन
- अपील: दंड देने वाले से अगले उच्च प्राधिकारी को, आदेश मिलने के 45 दिन के भीतर। पर्याप्त कारण होने पर देर से अपील भी स्वीकार की जा सकती है।
- अपील पर कर्मचारी के स्वयं के हस्ताक्षर हों, भाषा सम्मानजनक हो, और यह ट्रेड यूनियन के माध्यम से नहीं दी जा सकती।
- बर्खास्तगी, सेवा से हटाने, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, पदावनति या वेतनवृद्धि रोकने के मामलों में अपीलीय प्राधिकारी अराजपत्रित कर्मचारी को व्यक्तिगत सुनवाई दे सकता है।
- बर्खास्त, सेवा से हटाए गए या अनिवार्य सेवानिवृत्त समूह सी कर्मचारी अपील निर्णय के 45 दिन के भीतर महाप्रबंधक से पुनरीक्षण का आवेदन कर सकते हैं और रेलवे दर अधिकरण को संदर्भ माँग सकते हैं।
- पुनरीक्षण (नियम 25): समय सीमा अपीलीय आदेश से 45 दिन, या अपील न होने पर 90 दिन। केवल एक पुनरीक्षण अनुमत है। निचले पुनरीक्षण प्राधिकारी को दंड बढ़ाने के लिए 6 महीने और घटाने के लिए 1 वर्ष के भीतर कार्य करना होता है।
- पुनर्विलोकन (नियम 25क): जब मामले की प्रकृति बदलने वाली नई सामग्री सामने आए, तो राष्ट्रपति किसी भी समय किसी भी आदेश की समीक्षा कर सकते हैं।
- नियम 31: इन नियमों से राष्ट्रपति को याचिका देने का अधिकार समाप्त नहीं होता।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत
- कोई अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं होना चाहिए।
- किसी को बिना सुने दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए; आरोप पहले बताए जाएँ और बचाव का उचित अवसर दिया जाए।
- निर्णय निष्पक्ष, सद्भाव में हों, और उनके कारण बताए जाएँ।