कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923

सभी विभागों के लिए सामान्य स्थापना नियम अध्याय 16/16 8 मिनट पठन स्रोत: अर्ध-आधिकारिक
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कर्मकार प्रतिकर अधिनियम 1923 में बना और 01.07.1924 से लागू हुआ। 2009 के संशोधन ने 'कर्मकार' के स्थान पर 'कर्मचारी' शब्द रखा, इसलिए अब यह कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम है। इसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा है: दुर्घटना या व्यावसायिक रोग से घायल कर्मचारी को, या कर्मचारी की मृत्यु पर आश्रितों को, प्रतिकर देना।

प्रतिकर कब देय है

कब मना किया जा सकता है (केवल चोट के मामले)
  • कर्मचारी शराब या मादक पदार्थ के प्रभाव में था।
  • कर्मचारी की सुरक्षा के लिए बने आदेश या नियम की जानबूझकर अवज्ञा।
  • सुरक्षा गार्ड या उपकरण को जानबूझकर हटाना या उसकी अनदेखी।
  • कर्मचारी की मृत्यु होने पर ये बचाव लागू नहीं होते।

प्रतिकर की राशि

दुर्घटना का परिणामप्रतिकर
मृत्युमासिक वेतन का 50% × संबंधित गुणक, या Rs 1,20,000, जो अधिक हो
स्थायी पूर्ण विकलांगतामासिक वेतन का 60% × संबंधित गुणक, या Rs 1,40,000, जो अधिक हो
स्थायी आंशिक विकलांगताकमाई क्षमता की हानि के अनुपात में (अनुसूची I या डॉक्टर के आकलन के अनुसार)
अस्थायी विकलांगतामासिक वेतन के 25% का अर्धमासिक भुगतान, विकलांगता की अवधि या 5 वर्ष, जो कम हो
अनुसूचीविषय
Iचोटें और कमाई क्षमता की % हानि (जैसे दोनों हाथों की हानि = 100%)
IIशामिल कर्मचारियों के वर्ग
IIIव्यावसायिक रोग
IVप्रतिकर की गणना के लिए आयु के अनुसार गुणक
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श्रम संहिताएँ
चार श्रम संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से लागू हैं। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 अब इस अधिनियम को समेकित करती है। विभागीय प्रश्नपत्र अब भी अधिनियम के नाम से प्रश्न पूछते हैं, इसलिए ऊपर दिए प्रावधान सीखें, पर बदले हुए आँकड़ों के लिए वर्तमान आदेश देखें।

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