अर्थिंग (ग्राउंडिंग) दोष धारा को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित होने हेतु निम्न-प्रतिरोध पथ प्रदान करती है, जिससे कर्मियों एवं उपकरणों की सुरक्षा होती है। रेलवे में, अर्थिंग दो संबंधित परंतु भिन्न संदर्भों में आती है: सामान्य विद्युत संस्थापन अर्थिंग, तथा मस्तों एवं संरचनाओं की कर्षण अर्थिंग/बॉन्डिंग (कर्षण एवं OHE अध्याय में शामिल)।
अर्थिंग के प्रकार
- प्लेट अर्थिंग — मिट्टी में लंबवत दबी धातु प्लेट, मृदा प्रतिरोधकता कम करने हेतु चारकोल/नमक से घिरी।
- पाइप अर्थिंग — जमीन में लंबवत गाड़ी गई जस्ती लोहे की पाइप; छोटे संस्थापनों हेतु अधिक सामान्य।
- स्ट्रिप/वायर अर्थिंग — खाई में क्षैतिज बिछाया गया कंडक्टर, प्रायः चट्टानी मिट्टी में जहां गहरे लंबवत इलेक्ट्रोड संभव नहीं।
पृथ्वी इलेक्ट्रोड प्रतिरोध (रॉड प्रकार, अनुमानित)
R = (ρ / 2πL) × [ln(4L/d) − 1]
ρ = मृदा प्रतिरोधकता, L = इलेक्ट्रोड लंबाई, d = इलेक्ट्रोड व्यास। व्यवहार में: इलेक्ट्रोड लंबाई बढ़ने एवं मृदा प्रतिरोधकता घटने (नम मिट्टी, रासायनिक उपचार) से प्रतिरोध घटता है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- पृथ्वी प्रतिरोध की समय-समय पर अर्थ टेस्टर (मेगर-प्रकार उपकरण) से जांच होनी चाहिए, स्थिर नहीं मानी जानी चाहिए।
- उपकरण अर्थिंग (बॉडी अर्थिंग) एवं सिस्टम/न्यूट्रल अर्थिंग भिन्न उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं — एक दोषपूर्ण आवरण से कर्मियों की रक्षा करता है, दूसरा सिस्टम वोल्टेज को स्थिर करता है।