रेलवे प्रकाश व्यवस्था में यार्ड लाइटिंग (रात में शंटिंग एवं सुरक्षा हेतु), प्लेटफ़ॉर्म एवं स्टेशन लाइटिंग, तथा रेलवे आवासीय क्षेत्रों के लिए टाउन/कॉलोनी आपूर्ति शामिल है। AEE-स्तरीय प्रश्न स्थापत्य विवरण के बजाय प्रकाश डिज़ाइन के मूल सिद्धांतों पर केंद्रित होते हैं।
मूल शब्दावली एवं इकाइयां
- ज्योति फ्लक्स (लुमेन, lm) — स्रोत द्वारा उत्सर्जित कुल प्रकाश।
- प्रदीप्ति (लक्स, lx) — किसी सतह पर पड़ने वाला प्रति इकाई क्षेत्र ज्योति फ्लक्स।
- ज्योति तीव्रता (कैंडेला, cd) — किसी दिशा में प्रति इकाई ठोस कोण फ्लक्स।
- उपयोग गुणांक एवं ह्रास गुणांक — किसी लक्ष्य लक्स स्तर हेतु आवश्यक ल्यूमिनेयर की संख्या की गणना में प्रयुक्त।
लुमेन विधि (ल्यूमिनेयर की संख्या)
N = (E × A) / (F × UF × MF)
N = ल्यूमिनेयर की संख्या, E = आवश्यक प्रदीप्ति (लक्स), A = क्षेत्रफल (m²), F = प्रति ल्यूमिनेयर लुमेन आउटपुट, UF = उपयोग गुणांक, MF = रखरखाव (ह्रास) गुणांक।
यार्ड लाइटिंग संबंधी विचार
- शंटिंग के दौरान चकाचौंध एवं छाया क्षेत्र कम करने हेतु बड़े यार्डों में व्यक्तिगत खंभों की तुलना में हाई-मास्ट टावर पसंद किए जाते हैं।
- LED फिक्स्चर अब पुराने सोडियम-वेपर/मरकरी-वेपर यार्ड लैंपों के मानक प्रतिस्थापन हैं — बेहतर दक्षता एवं कम रखरखाव।
सामग्री स्थिति
यह ड्राफ्ट नोट है, प्लेटफ़ॉर्म स्केलेटन हेतु स्वयं तैयार किया गया है। इसे अभी तक आधिकारिक RBE 14/2014 पाठ्यक्रम पीडीएफ के विरुद्ध सत्यापित नहीं किया गया है — सत्यापन तक केवल अध्ययन-सहायता मानें।