यह अध्याय 132 kV (या समान) ग्रिड इंटरफेस से रेलवे कर्षण उप-स्टेशनों को फीड करने वाले उपकरणों तथा दोषों को सबसे छोटे संभव खंड तक सीमित रखने वाले सुरक्षा दर्शन को शामिल करता है।
सुरक्षा रिले — वे क्या पहचानते हैं
- ओवरकरंट रिले (OC) — जब धारा निर्धारित सीमा से अधिक हो तो ट्रिप करता है, सबसे बुनियादी दोष सुरक्षा।
- दूरी (प्रतिबाधा) रिले — पारेषण लाइनों पर सामान्यतः प्रयुक्त; प्रतिबाधा मापकर दोष स्थान का अनुमान लगाता है तथा अपने निर्धारित क्षेत्र के भीतर दोषों हेतु ट्रिप करता है।
- डिफरेंशियल रिले — किसी सुरक्षित क्षेत्र (जैसे ट्रांसफार्मर) में प्रवेश एवं निकास धारा की तुलना करता है; आंतरिक दोषों पर ट्रिप करता है, बाहरी दोषों हेतु स्थिर रहता है।
- अर्थ फॉल्ट रिले — विशेष रूप से पृथ्वी में लीक हो रही धारा का पता लगाता है, फेज़-टू-फेज़ ओवरकरंट से अलग।
CT बनाम PT — भ्रमित न हों
- करंट ट्रांसफार्मर (CT) — लाइन के साथ श्रृंखला में जुड़ा, उच्च धारा को रिले/मीटर हेतु मानक सेकेंडरी (सामान्यतः 1A या 5A) तक घटाता है।
- पोटेंशियल ट्रांसफार्मर (PT) — लाइन के समानांतर जुड़ा, उच्च वोल्टेज को रिले/मीटर हेतु मानक सेकेंडरी (सामान्यतः 110V) तक घटाता है।
- प्राथमिक धारा प्रवाहित रहते हुए CT सेकेंडरी को कभी भी खुला-सर्किट नहीं छोड़ना चाहिए — इसमें खतरनाक रूप से उच्च वोल्टेज विकसित हो सकता है।
परीक्षा पर ध्यान
एक क्लासिक ट्रैप प्रश्न: 'यदि CT सेकेंडरी खुला-सर्किट हो जाए तो क्या होता है?' — उत्तर है खुले टर्मिनलों में खतरनाक रूप से उच्च वोल्टेज, न कि सहज बुद्धि के अनुसार शून्य धारा।